मिलावटी दूध पर इंदौर प्रशासन का सख्त एक्शन: शहरभर में जांच अभियान तेज, 12 नमूने लैब भेजे गए

 


इंदौर | आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में मिलावटी दूध के सेवन से 16 लोगों की दुखद मृत्यु की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस गंभीर घटना के बाद इंदौर जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा प्रशासन को शहर में दूध और दुग्ध उत्पादों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों को मिलावट रहित और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।

कलेक्टर के आदेश के पालन में आज सुबह से ही खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में सघन निरीक्षण शुरू कर दिया है। कनाडिया क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान कुल 12 संदिग्ध नमूने एकत्र किए गए। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जोशी दूध दही भंडार से 4 नमूने, ओसवाल डेरी से 3 नमूने, गणेश दूध दही भंडार से 3 नमूने और पूजा डेरी से दूध व मावा के 2 नमूने जांच के लिए लिए। इस दौरान टीम ने डेयरी परिसरों में स्वच्छता मानकों का भी बारीकी से निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने डेयरी संचालकों को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने संचालकों को डेयरी में साफ-सफाई बनाए रखने और खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। टीम ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी संस्थान खराब गुणवत्ता या मिलावटी उत्पाद बेचते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी ने जानकारी दी कि आज एकत्र किए गए सभी 12 नमूनों को विस्तृत परीक्षण के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के विभिन्न प्रावधानों के तहत दोषी प्रतिष्ठानों पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह जांच अभियान केवल आज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में भी शहर के अन्य इलाकों में निरंतर जारी रहेगा।

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