‘लाड़ली लक्ष्मी’ से परायापन

  •  लाड़ली लक्ष्मी योजना पर उठे सवाल: बच्चियों को नहीं मिल रही छात्रवृत्ति, दस्तावेजों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे परिजन
  • योजना का लाभ पाने के लिए आंगनवाड़ी, बैंक और स्कूल के बीच भटक रहे परिवार, जिम्मेदार अधिकारियों से व्यवस्था सुधारने की मांग


इंदौर | मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली लक्ष्मी योजना को लेकर अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। सरकार ने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की थी, लेकिन जमीनी स्तर पर कई परिवारों को इसका लाभ मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

परिजनों का आरोप है कि बच्चियों के खातों में समय पर छात्रवृत्ति की राशि नहीं पहुंच रही है। वहीं, योजना का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा कराने के नाम पर परिवारों को कभी आंगनवाड़ी, कभी बैंक तो कभी स्कूल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि जब परिजन संबंधित अधिकारियों से संपर्क करते हैं तो उन्हें आंगनवाड़ी में दस्तावेज जमा कराने की सलाह दी जाती है। वहीं, आंगनवाड़ी केंद्रों से कभी बैंक जाने तो कभी स्कूल से फॉर्म लाने के लिए कहा जाता है। ऐसे में परिजन समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर उनकी समस्या का समाधान कहां होगा।

बताया जा रहा है कि कई परिवार दस्तावेजों की पूर्ति करते-करते वर्षों तक परेशान रहते हैं। स्थिति यह है कि कुछ बच्चियां कक्षा 9वीं तक पहुंच जाती हैं, लेकिन उनके खाते में योजना के तहत मिलने वाली छात्रवृत्ति की राशि नहीं पहुंच पाती।

परिजनों का कहना है कि सरकार योजनाएं तो शुरू कर देती है, लेकिन उनके क्रियान्वयन और निगरानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और संबंधित विभागीय कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी है कि वे पात्र बच्चियों के परिजनों को सही जानकारी दें और दस्तावेजों की प्रक्रिया में उनका सहयोग करें, न कि उन्हें बार-बार इधर-उधर भेजकर परेशान करें।

सरकार से व्यवस्था सुधारने की मांग

परिजनों ने सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना से संबंधित सभी लंबित मामलों की समीक्षा की जाए। जिन बच्चियों के खातों में राशि नहीं पहुंची है, उनके परिवारों को विभाग की ओर से सूचना देकर कमी और समस्या की स्पष्ट जानकारी दी जाए।

साथ ही, संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि दस्तावेजों की प्रक्रिया सरल बनाई जाए और आंगनवाड़ी, बैंक तथा स्कूल के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि पात्र बच्चियों को समय पर योजना का लाभ मिल सके।

बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के उद्देश्य से शुरू की गई योजना का लाभ यदि समय पर पात्र बच्चियों तक नहीं पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है। अब जरूरत है कि सरकार केवल योजना के प्रचार तक सीमित न रहे, बल्कि उसकी जमीनी स्थिति पर भी ध्यान दे।

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