हिंदुस्तान में कैनोइंग का एकमात्र प्राकृतिक केंद्र- गुप्ता
खरगोन। प्रदेश की जीवन रेखा मां नर्मदा सदियों से अपनी गोद में संस्कृतियों को पाले हुए है। जीवन दायिनी मां नर्मदा ने क्या कुछ नहीं दिया है। दोनों किनारों पर रहने वाली जनता को और मीलों दूर रहने वाले बड़े नगरों को नागरिकों को। इसके अलावा एक ऐसी चीज भी दी हैं, जिसके कारण महेश्वर न सिर्फ पर्यटन के लिए बल्कि खेल के लिए भी इन दिनों अपनी पहचान बनाए हुए है। आज मां नर्मदा जयंती पर जीवन दायिनी के इस प्राकृतिक उपहार पर हम सब गौरान्वित हो रहे हैं। खेलो इंडिया-2022 में पहली बार वॉटर स्पोर्ट्स को शामिल किया गया है। मप्र के 8 जिलों को यह सौभाग्य मिला है कि वे राष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन की मेजबानी करें। उन जिलों में खरगोन भी एक है जहां कैनो स्लेलम की प्रतियोगिता होगी। यह जानना जरूरी है कि यह एक विशेष खेल है जो सिर्फ पानी मे ही खेला जा सकता है। वो भी ऐसी जल धारा में जो एक विशेष स्थल व गति से बहती हो। ऐसी ही गति और स्थल माँ नर्मदा के आंचल में एक प्राकृतिक खेल स्थल के रूप में है। जो हिंदुस्तान में सहस्त्राधारा जैसा और कहीं भी नहीं है।
कैनोइंग के कोच देवेंद्र गुप्ता कहते है कि यहां की जलधारा अद्भुत है। हिंदुस्तान में कैनोइंग के लिए ऐसा प्राकृतिक खेल स्थल या ट्रेक और कही नही है। यहां कैनोइंग के लिए कुछ नही करना पड़ता है। बाकी अन्य जगह पर कुछ विशेष प्रयास करने पड़ते है। हिंदुस्तान में एक ही ऐसा ट्रेक है जो कैनो प्रतियोगिता के हिसाब से सबसे उपयुक्त है। वॉटर स्पोर्ट्स में दो नई खेल विधा खेलो इंडिया-2022 में शामिल हुई है। इसमें कायकिंग और कैनोइंग दो खेल विधाएं है।
जिला खेल अधिकारी पवि दुबे ने बताया कि कायकिंग स्प्रिंट और कैनो स्लेलॅम दो खेल प्रतियोगिताएं है। श्री गुप्ता के अनुसार स्प्रिंट बिल्कुल रुके या थमे हुए पानी में सिंगल डबल और चार सीटर बोट भी होती है। साथ ही इसमें एक रॉड में दो ब्लेड्स (चप्पू) लगी होती है। इसी तरह स्लेलम केवल रनिंग वॉटर में होता है। इसमें सिंगल और डबल सीटर भी होता है। स्लेलम सिंगल ब्लेड्स के साथ खेला या नाव चलायी जाती है। खेलों इंडिया में सिर्फ एशियन गेम्स व ओलंपिक में होने वाली प्रतियोगिता के मापदंडों के अनुरूप ही महेश्वर में होने वाली कैनो स्लेलॅम में सिंगल सीटर की प्रतियोगिता ही होगी।
खेलो इंडिया शुभारम्भ के दो दिन शेष
खेलों इंडिया के भव्य शुभारम्भ के लिए अब सिर्फ दो दिन शेष रह गए हैं। भोपाल के तात्या टोपे स्टेडियम में 30 जनवरी को इस खेल कुंभ का आगाज होगा। इस बार सिर्फ भोपाल में ही नहीं महेश्वर में भी जब-जब खिलाड़ियों का हौसला बढेगा, तब-तब हिंदुस्तान का दिल धड़केगा। इसी धड़कन को न सिर्फ खेलने वाले खिलाड़ी बल्कि खेलप्रेमी और आम नागरिक भी महसूस करेंगे। शनिवार को खेलों इंडिया की मस्कट आशा ने महेश्वर के स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों को परिचय देते हुए कहा हैल्लो मैं हूं आशा। महेश्वर तैयार हो जाये हिंदुस्तान का दिल धड़काने के लिए। स्कूली छात्रों और शिक्षकों ने मस्कट आशा का अभूतपूर्व स्वागत करते हुए खेलों इंडिया के थीम सांग पर थिरके भी। महेश्वर के प्राकृतिक जल धारा सहस्त्रधारा में शामिल होने के लिए खिलाड़ी भी पहुंच चुके हैं।




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