तलाश समाचार इंदौर|
पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, यह ज़िम्मेदारी है सच के साथ खड़े रहने की, सत्ता से सवाल पूछने की और समाज के उस हिस्से की आवाज़ बनने की, जिसकी आवाज़ अक्सर दबा दी जाती है। इसी भावना के साथ जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश - जम्प (JAMP), जो कि नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया - एनयूजेआई (NUJI) से संबद्ध है, की नवगठित कार्यकारिणी की प्रथम प्रदेश कार्यसमिति बैठक 17 दिसंबर 2025 को भोपाल के होटल सुकून प्रेस्टिज पैलेस, शिवाजी नगर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई।
बैठक का सधे हुए शब्दों से परिपूर्ण संचालन वरिष्ठ पत्रकार चंपालाल गुर्जर द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर अंत तक यह स्पष्ट था कि यह कोई औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि आत्ममंथन और पुनर्संकल्प का मंच है।
इस अवसर पर एनयूजेआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष संपादक सुरेश शर्मा ने अपने विचार रखते हुए पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप पर बेहद स्पष्ट ज़रूरी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि “वास्तविकता यह है कि पत्रकारिता का जो मूल आधार था, हम उससे दूर होते चले गए हैं। आज सबकी ज़रूरत विज्ञापन की हो गई है। पहले भी कई उद्योगपति पत्रकारिता में थे गोयनका, बिड़ला जैसे नाम थे। आज के कॉरपोरेट मॉडल से अलग था। आज अडानी-अंबानी हैं दोनों का चरित्र अलग था दोनों के दृष्टिकोण में फर्क साफ़ दिखाई देता है।”
उन्होंने तथाकथित एंकर-शो संस्कृति पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जो एंकर न्यूज़ पढ़ रहा है, बहस करा रहा है, प्रवक्ताओं को बुलाकर शोर मचा रहा है उसे पत्रकारिता से जोड़ना भूल है। वह एक शो कर रहा है। पत्रकार का काम यह तय करना है कि घटना क्या है, उसका सामाजिक अर्थ क्या है और जनता के लिए उसका महत्व क्या है।”
भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय की बात को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि आज खबर और सूचना के फर्क को हमने भुला दिया है। “मूलतः खबर वही है, जो लोगों को मालूम नहीं है। जबसे हमने खबर की जगह सिर्फ सूचना का आदान-प्रदान शुरू किया, तभी से हमारी साख गिरनी शुरू हुई।”
सुरेश शर्मा ने ज़ोर देकर कहा कि पत्रकारिता को फिर से जनता की ओर लौटना होगा। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने का अर्थ ही जनसरोकार है। आज पत्रकारिता पर लांछन इसलिए लग रहे हैं क्योंकि हमने अपना मूल काम छोड़ दिया और दूसरा काम करने लग गए। सरकारें झुकाई जा सकती है अगर आपका रास्ता सही हो और स्वार्थपूर्ण ना हो।
उन्होंने नौकरशाही की बढ़ती उद्दंडता को लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया और कहा कि, “पत्रकार की लेखनी से अगर ब्यूरोक्रेसी जवाबदेह नहीं होती, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए और भी घातक होगा। आज स्थिति यह है कि जब तक ऊपर से फोन न आए, तब तक बात नहीं सुनी जाती। यदि मीडिया अपनी बात को स्पष्ट, तथ्यपूर्ण और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं करेगा, तो उसकी मार्केट वैल्यू स्वतः गिरती चली जाएगी।”
मध्यप्रदेश में लंबे समय से पत्रकार कल्याण समिति के गठन न होने पर चिंता जताते हुए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पत्रकार सुरक्षा कानून पर दी गई सहमति का उल्लेख किया और वर्तमान मोहन सरकार से आग्रह किया कि उस कानून को फिर से चर्चा में लाया जाए।
इस अवसर पर जम्प के प्रदेश अध्यक्ष रवीन्द्र वाजपेयी ने संगठनात्मक मजबूती पर केंद्रित वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि, “नया साल हमें एक संकल्प के साथ शुरू करना है। संगठन का सशक्तिकरण ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। सभी जिला इकाई को हर महीने कम से कम एक ऐसा कार्यक्रम करना होगा, जिसका संदेश समाज तक पहुंचे।” उन्होंने स्पष्ट कहा, “पत्रकार श्रमजीवी नहीं, बल्कि बुद्धिजीवी हैं। पिछले 15–20 वर्षों में पत्रकारों के अध्ययन और बौद्धिक तैयारी में आई कमी पर आत्मचिंतन की आवश्यकता है। अगला वर्ष हमें अपने संगठन को देश की सबसे समृद्ध और सशक्त इकाइयों में खड़ा करने में लगाना है।”
कार्यक्रम में एनयूजेआई के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जम्प के पूर्व अध्यक्ष वयोवृद्ध वरिष्ठतम पत्रकार रामभुवन सिंह कुशवाह ने संगठन की ताकत पर विश्वास जताते हुए कहा कि, “पत्रकार कमजोर नहीं है किसी भी तरह से और न ही हमारा संगठन। पूरी दुनिया में आईएफजे से संबद्ध एनयूजे के नाम से हर राष्ट्र में संगठन खड़े है। भारत में जिन राज्यों में एनयूजेआई की इकाई नहीं थी, वहां भी सुरेश शर्मा के नेतृत्व में इकाइयां बनी हैं।”
एनयूजेआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने कहा कि देश के लगभग सभी ट्रेड यूनियन कंट्रोवर्सी में हैं। परमानेंट अध्यक्ष और परमानेंट महामंत्री के लिए। एनयूजेआई में स्थायी अध्यक्ष या महामंत्री की संस्कृति नहीं है। पहले ‘दिल्ली इज़ एनयूजेआई, एनयूजेआई इज़ दिल्ली' जैसी धारणा थी। इसको हमने समाप्त किया है। किसी प्रकार का कोई संकट नहीं है हमारा संगठन पूरी तरह संवैधानिक और पारदर्शी ढंग से कार्य कर रहा है।”
इस बैठक में मुझे भी अपने विचार रखने का अवसर प्राप्त हुआ। मैंने सभी वरिष्ठों का आभार व्यक्त करते हुए दादा माखनलाल चतुर्वेदी के अमर शब्दों को स्मरण किया, “पत्रकार के लिए सबसे बड़ी चीज़ उसकी कलम है, जो न रुकनी चाहिए, न झुकनी चाहिए, न अटकनी चाहिए और न ही भटकनी चाहिए।” मैंने अपनी मलेशिया यात्रा के अनुभव साझा करते हुए सभी से स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद बनाए रखने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी ने स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया और संगठन को और अधिक सशक्त, ईमानदार व जनपक्षधर बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार साथी शामिल हुए जिनमें एनयूजेआई महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका आभा निगम, जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश इंदौर संभाग के अध्यक्ष चंपालाल गुर्जर, महेन्द्र दुबे, राजेश यादव, नंदकुमार चौहान, अशोक बडगुर्जर, दिनेश सालवी, प्रकाश त्रिवेदी, ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, चेतन अग्रवाल, लक्ष्मीनारायण वैष्णव, आरडी राठौर, सुरेन्द्र नामदेव, दीपक यादव, जितेंद्र माहेश्वरी, सुरेश कटलाना, ओमप्रकाश जैन, देवेंद्र शिवरे (जीतू), ओमप्रकाश चौहान, मनोज सालुंके , भूपेंद्र दंडोतिया सहित बड़ी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित थे।









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