मरीज की मौत के बाद सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में हंगामा, डॉक्टरों से मारपीट और ICU में तोड़फोड़

 


इंदौर। इंदौर के सरकारी सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में मंगलवार शाम 60 वर्षीय मरीज ताहिरा कपाड़िया की मौत के बाद जमकर हंगामा हो गया। आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से विवाद किया। मामला बढ़ने पर परिवार के एक युवक द्वारा डॉक्टरों के साथ मारपीट करने और ICU में रखे जीवनरक्षक उपकरणों को नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई है। अचानक हुए हंगामे से ICU में भर्ती अन्य मरीजों और उनके परिजनों में भी दहशत फैल गई। स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ अपनी सुरक्षा के लिए ICU से बाहर निकल आए। सूचना मिलने के बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।

घटना मंगलवार शाम करीब 7 बजे अस्पताल की छठी मंजिल स्थित ICU में हुई। बताया जा रहा है कि मरीज की हालत पहले से गंभीर थी और वह हृदय संबंधी समस्या के चलते उपचार के लिए भर्ती थी। परिजनों के मुताबिक डॉक्टरों ने हार्ट में ब्लॉकेज बताया था और स्टेंट डालने की प्रक्रिया के लिए मरीज को ले जाया गया था। कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलने पर परिजन आक्रोशित हो गए और इलाज को लेकर डॉक्टरों से सवाल-जवाब करने लगे।

परिजनों का आरोप है कि मरीज को प्रक्रिया के लिए ले जाने के करीब 20 मिनट बाद डॉक्टर बाहर आए और इमरजेंसी की बात कही। परिजनों के मुताबिक उस समय मरीज की सांसें चल रही थीं और नर्सिंग स्टाफ के दो कर्मचारियों ने CPR भी दिया, लेकिन कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि मरीज की मौत की वास्तविक वजह क्या रही, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

विवाद बढ़ा तो ICU में तोड़फोड़

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में डॉक्टरों ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया। इसी दौरान परिवार के एक युवक द्वारा डॉक्टरों से मारपीट करने और ICU में रखे कुछ मेडिकल उपकरण उठाकर फेंकने की बात सामने आई है। घटना के बाद मेडिकल स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा को देखते हुए डॉक्टर, नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ ICU से बाहर निकल गया।

हंगामे का असर ICU में भर्ती दूसरे मरीजों पर भी पड़ा। कुछ समय के लिए उपचार व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बन गई। मरीज की डेडबॉडी भी काफी देर तक ICU में ही रखी रही। बाद में पुलिस की मौजूदगी में पांच परिजनों को डॉक्टर के साथ ICU में जाने देने पर सहमति बनी।


पुलिस ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। अस्पताल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। मरीज की मौत के कारणों के साथ ही परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप, मारपीट और अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

ICU की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में CCTV कैमरे और सुरक्षा गार्ड होने के बावजूद बाहरी लोग ICU जैसे संवेदनशील क्षेत्र तक कैसे पहुंचे और मेडिकल उपकरणों तक उनकी पहुंच कैसे हुई, यह जांच का विषय है। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।



इलाज के साथ 'व्यवस्था' के नाम पर वसूली के आरोप

वहीं, अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर मरीजों और उनके परिजनों के बीच पहले से नाराजगी की चर्चा भी सामने आती रही है। आरोप हैं कि अस्पताल में कुछ सफाईकर्मियों द्वारा मरीजों के परिजनों से अलग-अलग काम के लिए पैसे मांगे जाते हैं। परिजनों का कहना है कि 'व्यवस्था' के नाम पर भुगतान लिया जाता है और कई मामलों में नकद के साथ ऑनलाइन भुगतान भी कराया जाता है।

सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि मरीज का डायपर बदलने के लिए भी 50 रुपये तक लिए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि ऐसी कथित वसूली नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी में होती है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।


 इस तरह की वसूली हो रही है तो अस्पताल प्रबंधन को इसकी जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऑनलाइन सामने आए एक स्क्रीनशॉट में मरीज के परिजनों से डायपर बदलने के लिए भी चार्ज लिए जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह सिर्फ एक सफाईकर्मी का मामला है, जबकि अन्य सफाईकर्मियों द्वारा भी ऐसी स्थिति होने की शिकायत है।

वहीं अस्पताल में कहीं लिफ्ट खराब है तो कहीं रास्तों में पानी और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। मरीजों और परिजनों की सुविधाओं पर ध्यान देने वाला कोई नजर नहीं आता।

मरीज की मौत के बाद परिजनों का आक्रोश अपनी जगह है, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से मारपीट तथा ICU में मेडिकल उपकरणों को नुकसान पहुंचाना किसी भी स्थिति में अस्पताल की व्यवस्था और दूसरे मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। साथ ही अस्पताल प्रशासन पर यह जिम्मेदारी भी है कि मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर व्यवस्था मिले और किसी भी तरह की अवैध वसूली या लापरवाही की शिकायत सामने आने पर तत्काल जांच की जाए।

अब पूरे मामले में पुलिस जांच और अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि मरीज की मौत की परिस्थितियां क्या थीं, हंगामा कैसे बढ़ा और अस्पताल में सुरक्षा तथा कथित वसूली से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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