मूसाखेड़ी स्थित राशन दुकान पर मनमानी के आरोप, उपभोक्ताओं को जबरन सामान खरीदने का दबाव
सरकारी राशन लेने पहुंचने वाले लोगों को पहले जेब ढीली करने का दबाव, 15 दिन ही वितरण करने और बदतमीजी से पेश आने की भी शिकायत
इंदौर। सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के लिए मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है, लेकिन मूसाखेड़ी स्थित एक राशन दुकान को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि यहां सरकारी राशन लेने पहुंचने वाले लोगों को पहले किराना सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। जब तक उपभोक्ता कुछ सामान नहीं खरीदता, तब तक उसे राशन नहीं देने का दबाव बनाया जाता है। यानी गरीब परिवारों के लिए राहत बनकर पहुंचने वाला राशन यहां कथित तौर पर किराना सामान बेचने का जरिया बन गया है।
राशन दुकान या किराना स्टोर?
खाद्य शाखा के अंतर्गत संचालित बताई जा रही सेवा प्रा. सह. उपभोक्ता, इंदौर की इस दुकान पर राशन वितरण से ज्यादा किराना सामान की बिक्री दिखाई देने का आरोप है। दुकान में किराना स्टोर की तरह विभिन्न सामान सजाकर रखे गए हैं। स्थानीय उपभोक्ताओं की शिकायत है कि दुकान संचालक की पहली प्राथमिकता किराना सामान बेचना है और सरकारी राशन वितरण बाद की बात है।
लोगों का आरोप है कि राशन लेने पहुंचने पर उनसे कहा जाता है कि पहले सामान खरीद लो, फिर राशन मिलेगा। ऐसे में उपभोक्ता अपनी जरूरत और आर्थिक स्थिति के अनुसार सामान खरीदने के बजाय मजबूरी में पैसे खर्च करने को विवश होते हैं। सवाल यह है कि जब सरकार पात्र हितग्राहियों को मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है, तो उन्हें राशन पाने के लिए अतिरिक्त सामान खरीदने की मजबूरी क्यों झेलनी पड़े?
मुफ्त राशन के नाम पर अतिरिक्त बोझ क्यों?
सरकारी राशन का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा देना है, न कि उन्हें किसी दूसरी खरीदारी के लिए बाध्य करना। यदि किसी राशन दुकान पर उपभोक्ताओं को किराना सामान खरीदने के बाद ही राशन देने की शर्त रखी जा रही है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। खाद्य विभाग को यह पता लगाना चाहिए कि दुकान पर वास्तव में क्या हो रहा है।
एक तरफ शहर में राशन वितरण व्यवस्था में गड़बड़ियों और कथित राशन माफिया की शिकायतें सामने आती रहती हैं, वहीं दूसरी ओर राशन दुकान पर किराना सामान खरीदने का दबाव बनाने के आरोप व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करते हैं। सरकारी राशन वितरण का केंद्र उपभोक्ता की जरूरत होनी चाहिए, न कि दुकानदार का निजी कारोबार।
महीने में सिर्फ 15 दिन राशन बांटने का आरोप
इस दुकान को लेकर एक और गंभीर शिकायत राशन वितरण के समय को लेकर है। यहां महीने में केवल 15 दिन ही राशन बांटा जाता है। 20 तारीख के बाद राशन लेने पहुंचने वाले लोगों को कथित तौर पर मना कर दिया जाता है। लोगों के मुताबिक, 21 तारीख के बाद दुकान अक्सर बंद रहती है।
खाद्य विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राशन वितरण के लिए निर्धारित नियम क्या हैं, हितग्राहियों को राशन देने की व्यवस्था किस तरह संचालित की जा रही है। पात्र व्यक्ति को केवल इसलिए राशन से वंचित नहीं होना चाहिए कि वह महीने के दूसरे हिस्से में दुकान पर पहुंचा है। वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।
उपभोक्ताओं से बदतमीजी, ‘हम आपके नौकर नहीं हैं’
स्थानीय लोगों ने दुकान संचालक के व्यवहार पर भी नाराजगी जताई है। आरोप है कि राशन लेने पहुंचने वाले लोगों से बदतमीजी की जाती है और उन्हें यह कहकर धमकाया जाता है कि ‘हम आपके नौकर नहीं हैं।’ सवाल यह है कि सरकारी व्यवस्था के तहत राशन वितरण करने वाले संचालक को उपभोक्ताओं से इस तरह पेश आने का अधिकार किसने दिया?
राशन लेने आने वाले लोग कोई एहसान मांगने नहीं पहुंचते। वे अपने अधिकार के तहत निर्धारित खाद्यान्न लेने आते हैं। ऐसे में उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। दुकान पर लोगों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंद हितग्राहियों को घंटों खड़े रहकर इंतजार करना पड़े, तो यह भी व्यवस्था की खामी है।
खाद्य विभाग कब लेगा सुध?
राशन दुकान को लेकर उठ रही शिकायतों पर खाद्य विभाग और जिला प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। दुकान के स्टॉक, वितरण रजिस्टर, आवंटित राशन, वितरण के दिनों और उपभोक्ताओं से की जा रही बिक्री की जांच होनी चाहिए।
यदि जांच में उपभोक्ताओं पर जबरन सामान खरीदने का दबाव बनाने, राशन वितरण में अनियमितता या अन्य नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस निलंबित करने या निरस्त करने की कार्रवाई भी नियमों के तहत की जाए।
सरकार गरीबों को मुफ्त राशन देकर राहत देना चाहती है, लेकिन यदि वितरण व्यवस्था में बैठे लोग ही कथित तौर पर इस राहत को अपनी दुकानदारी का माध्यम बना लें, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खाद्य विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि राशन दुकान पर पहले किराना खरीदने की मजबूरी नहीं, बल्कि पात्र हितग्राहियों को उनका हक मिले।




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