निगम अफसरों की मिलीभगत से नियमों की अनदेखी
तलाश समाचार, इंदौर
शहर में रहवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होटल, हॉस्टल और रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं बताया जाता है कि नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से यह अवैध गतिविधियां खुलेआम चल रही हैं, जबकि नियमों के तहत रहवासी भवनों में कमर्शियल गतिविधियों की अनुमति नहीं है।
शहर के महालक्ष्मी नगर, वीणा नगर, विजय नगर, चिकित्सक नगर, भंवरकुआं और इंद्रपुरी सहित कई प्रमुख इलाकों में घरों के नक्शे रहवासी उपयोग के लिए पास कराए गए, लेकिन बाद में इनका उपयोग होटल, हॉस्टल और रेस्टोरेंट के रूप में किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
विधानसभा में सवाल के बाद जागा निगम
ज्ञात रहे कि विधायक महेंद्र हार्डिया द्वारा विधानसभा में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद नगर निगम हरकत में आया। इसके बाद महालक्ष्मी नगर, वीणा नगर और चिकित्सक नगर क्षेत्र में करीब 16 होटलों को सील किया गया। हालांकि यह कार्रवाई सीमित रही और अन्य क्षेत्रों में अब भी अवैध रूप से होटल, हॉस्टल और रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं।
नियमों का उल्लंघन, सुरक्षा पर खतरा
गौरतलब हैं कि रहवासी क्षेत्रों में बिना अनुमति कमर्शियल गतिविधियां संचालित होने से भवनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं होता। हादसों की आशंका बढ़ जाती है, ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या होती है इसके अलावा शासन को मिलने वाले कमर्शियल टैक्स और शुल्क का भी नुकसान हो रहा है।
निगम पर सवालिया निशान
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि निगम अधिकारियों की शह के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध संचालन संभव नहीं है। आरोप है कि कुछ अधिकारी निजी लाभ के लिए नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं और शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि सभी रहवासी क्षेत्रों में सर्वे कर अवैध प्रतिष्ठानों की पहचान की जाए दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। नियमों का कड़ाई से पालन हो निगम की कमाई बढ़ेगी और अनाधिकृत प्रतिष्ठानों पर नकेल कसी जा सकती हैं।




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