डायपर बदलने के नाम पर वार्ड बॉय वसूल रहे 50-50 रुपए
इंदौर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में वार्ड बॉय मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर डायपर बदलने के नाम पर हर बार ₹50 की अवैध वसूली कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि यह वसूली नर्सिंग स्टाफ के सामने खुलेआम होती है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
परिजनों का कहना है कि गंभीर मरीज अपना डायपर खुद नहीं बदल सकते और परिवार के लोग भी कई बार यह काम करने की स्थिति में नहीं होते। ऐसे में मजबूरी का फायदा उठाकर वार्ड बॉय प्रति बार ₹50 की मांग करते हैं। आरोप है कि पैसे नहीं देने पर मरीजों की देखभाल में भी लापरवाही बरती जाती है।
इतना ही नहीं, मरीजों ने अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि डॉक्टर मरीजों को बिना ठीक से जांचे इलाज कर रहे हैं, नर्सें दवाइयां और अन्य जिम्मेदारियां भी परिजनों पर छोड़ देती हैं। ICU सहित कई वार्डों में मरीजों की देखरेख संतोषजनक नहीं होने की शिकायत सामने आई है।
इस तरह पैदल रास्ते पर गंदगी और टूटी कुर्सियां और बॉक्स के डब्बे पड़े हैं
मरीजों का यह भी कहना है कि अस्पताल में कई लिफ्ट होने के बावजूद मरीजों के लिए केवल एक-दो लिफ्ट ही संचालित रहती हैं, जिससे जांच के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। वहीं अस्पताल परिसर में गंदगी और अव्यवस्था भी देखने को मिल रही है।
परिजनों का दावा है कि इस पूरे मामले की जानकारी अस्पताल अधीक्षक को भी दी गई, लेकिन उनसे लिखित शिकायत मांगी गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि मरीजों से अवैध वसूली की शिकायतें पहले से मिल रही हैं, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
यह न सिर्फ मरीजों के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर हैं।
प्रदेश के सबसे अंत्यधुनिक अस्पताल में मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाने चादर बदलने डायपर बदलने एवं रूम की साफ सफाई करने के नाम पर जबरिया वसूली की जा रही है इसकी शिकायत अस्पताल अधीक्षक से करने के बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है बताया जाता है की अस्पताल में कामकाज के लिए आउटसोर्स कंपनी के कर्मचारियों को रखा गया है इसके चलते इन कर्मचारियों की मनमानी मरीज और उनके परिजनों के लिए परेशानी का सबक बन गई है। सूत्रों का दावा है अस्पताल अधीक्षक द्वारा अपने चहेतो को मुफ्त दवा के साथ ही निजी कक्ष भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं वहीं सामान्य तौर पर पहुंचने वाले मरीजों की अनदेखी की जा रही है।





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